बचपन की पुरानी यादें शायरी | Latest Bachpan Ki Purani Yaadein Shayari

इन बचपन की पुरानी यादें शायरी को पढ़कर यकीनन आपके मन में भी बीते दिनों की मीठी यादें ताज़ा हो जाएँगी। यहाँ पर लिखी शायरिया आपको उन खूबसूरत लम्हों की सैर कराएँगी, जहाँ मासूमियत, खुशियाँ और बेफिक्र ज़िंदगी बसी हुई थी। कुछ पल के लिए आप भी अपने सुनहरे बचपन की यादों में खो जाएँगे।

Bachpan ki Yaadein Shayari

Bachpan ki galiyon mein sukoon hi sukoon tha,
Aaj sab kuch hai, par woh masoom junoon kahan tha.

Na paison ki fikr thi, na kal ka darr tha,
Bachpan ka har din ek khoobsurat safar tha.

Woh mitti ki khushboo aur baarish ka paani,
Bachpan ki yaadein lagti hain sabse suhani.

वक्त से पहले ही वो हमसे रूठ गयी है,
बचपन की मासूमियत न जाने कहाँ छूट गयी है।

Waqt se pehle hi woh humse rooth gayi hai,
Bachpan ki masoomiyat na jaane kahan chhoot gayi hai.

Na mobile tha, na duniya ka shor,
Bachpan ki hansi hi thi sabse bada zor.

कौन कहता है कि मैं जिंदा नहीं,
बस बचपन ही तो गया है बचपना नहीं।

School ki masti aur doston ka saath,
Aaj bhi yaad aata hai woh pyaara bachpan ka raasta.

Bade hote hi khushiyan kahin kho si gayi,
Bachpan ki yaadein bas dil mein hi reh gayi.

बचपन की यादें स्टेटस

बचपन के वो दिन आज भी बहुत याद आते हैं,
जब छोटी-सी खुशी में भी हम मुस्कुराते थे।

न दौलत की चाह थी, न किसी बात का गम,
बचपन के दिन थे सबसे खूबसूरत और बेफिक्र हम।

वो गलियों में खेलना और दोस्तों का साथ,
आज भी याद आते हैं बचपन के वो दिन और वो बात।

बचपन की यादें दिल से कभी मिटती नहीं,
वो प्यारी-सी खुशियाँ जिंदगी में फिर मिलती नहीं।

काश लौट आए बचपन का वो प्यारा जमाना,
जहाँ हँसने के लिए किसी वजह की जरूरत नहीं थी।

कुछ यादें उम्र के साथ पुरानी नहीं होतीं,
बचपन की बातें दिल से कभी दूर नहीं होतीं।

बचपन की पुरानी यादें शायरी

बचपन की पुरानी यादें शायरी
Bachpan Ki Purani Yaadein Shayari

बचपन एक ऐसा समय होता है जब जीवन की हर छोटी चीज़ में खुशियाँ छिपी होती हैं। यह वह दौर है जब मासूमियत, खेलकूद और बिंदास मस्ती का कोई मुकाबला नहीं होता।

बचपन की पुरानी यादें शायरी हमेशा दिल को छू लेने वाली होती हैं, जिनमें दोस्तों के साथ बिताए गए पल, परिवार का प्यार और त्योहारों की धूमधाम शामिल होती हैं।

बचपन की यादें आज भी दिल को हँसा जाती हैं,
वो बीते हुए पल आँखों में उतर आती हैं।

एक बचपन का जमाना था,
खुशियों से भरा हुआ,
याद तो आना ही था।

Bachpan Ki Yaadein
Bachpan Ki Yaadein

ना किसी बात की चिंता थी, ना कोई परेशानी,
कितना खूबसूरत था बचपन, कितनी प्यारी थी कहानी।

बचपन गुज़र गया पर उसकी यादें बाकी हैं,
दिल के किसी कोने में आज भी वो झाँकी हैं।

न दौलत की चाह थी, न शोहरत का ख़्वाब था,
बचपन का हर दिन अपने आप में लाजवाब था।

जैसे बिन किनारे की कश्ती,
वैसे ही हमारे बचपन की मस्ती।

Bachpan ki masti
Bachpan ki masti

बचपन की वो हँसी आज भी दिल में बसी है,
वक़्त गुज़र गया मगर यादें वहीं खड़ी हैं।

कागज़ की नाव और बारिश का पानी,
याद आती है बचपन की हर एक निशानी।

वो दोस्तों के साथ खेलना और शरारतें करना,
आज भी यादों में बचपन का घर बसता है।

बचपन के दिन थे सबसे प्यारे,
ना थे गम के बादल, ना दुख के नज़ारे।

बचपन की यादें दिल को यूँ छू जाती हैं,
जैसे पुरानी तस्वीरें फिर मुस्कुरा जाती हैं।

Bachpan ki yaadein dil ko chhoo jaati hain
Bachpan ki yaadein dil ko chhoo jaati hain

खिलौनों से खेलते थे, सपनों में जीते थे,
बचपन के वो दिन ही सबसे हसीन होते थे।

आज भी याद आते हैं वो बेफ़िक्र ज़माने,
जब छोटी-सी बात पर खुश हो जाते थे दीवाने।

खिलौनों में दुनिया और सपनों में उड़ान थी,
बचपन की हर सुबह खुशियों की पहचान थी।

न कोई चिंता थी, न किसी बात का डर था,
बचपन का हर दिन सच में सुनहरा सफ़र था।

शौक जिन्दगी के अब जरुरतो में ढल गये,
शायद बचपन से निकल हम बड़े हो गये।

Bachpan ki yaadein 2 line shayari
Bachpan ki yaadein 2 line shayari

वक्त बीत गया पर यादें रह गईं,
बचपन की मीठी बातें दिल में बस गईं।

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी,
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया।

भटक जाता हूँ अक्सर खुद हीं खुद में,
खोजने वो बचपन जो कहीं खो गया है।

वो शरारत,वो मस्ती का दौर था,
वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था।

ऐ जिंदगी तू ले चल मुझे,
बचपन के उस गलियारे में,
जहाँ मिलती थी हमें खुशियाँ,
गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह रचाने में।

वो मिट्टी में खेलना, वो हँसना-गाना,
याद आता है बचपन का सुहाना ज़माना।

बचपन भी कमाल का था,
खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर,
आँख बिस्तर पर ही खुलती थी।

वक्त से पहले ही वो हमसे रूठ गयी है,
बचपन की मासूमियत न जाने कहाँ छूट गयी है।

आज भी जब बचपन याद आता है,
दिल पुरानी गलियों में खो जाता है।

बचपन की यादें किसी खजाने से कम नहीं,
ये वो दौलत है जो कभी खत्म नहीं होती।

बचपन शायरी 2 लाइन

बचपन शायरी 2 लाइन

बचपन के दिन शायद ही कोई भूल पाता है। वो छोटी-छोटी खुशियाँ, दोस्तों के साथ खेलना, बिना किसी चिंता के दिन बिताना और परिवार के साथ बिताए खूबसूरत पल आज भी याद आते हैं। हर किसी के दिल में बचपन की कुछ ऐसी यादें जरूर होती हैं, जिन्हें वह दोबारा जीना चाहता है।

नीचे दी गई बचपन की शायरी आपको आपके बचपन के उन प्यारे और यादगार लम्हों की याद दिलाएगी। आप इन शायरियों को पढ़कर अपनी पुरानी यादों को ताजा कर सकते हैं और अपने दोस्तों व अपनों के साथ शेयर भी कर सकते हैं।

कौन कहता है कि मैं जिंदा नहीं,
बस बचपन ही तो गया है बचपना नहीं।

मिट्टी में खेलकर भी हम खुश हो जाते थे,
बचपन के दिन सच में सोने से भी प्यारे होते थे।

कागज़ की नाव और बारिश का पानी,
बचपन की यादें आज भी लगती हैं कहानी।

स्कूल की घंटी और छुट्टी का इंतजार,
बचपन का हर दिन लगता था त्योहार।

आते जाते रहा कर ए दर्द,
तू तो मेरा बचपन का साथी है।

बचपन की वो हँसी, वो खेलों की शाम थी,
ना कोई फिक्र थी, बस खुशियों का नाम थी।

धूल में सने हाथ, और सपनों की उड़ान थी,
बचपन की हर याद जैसे कोई मीठी कहानी थी।

कौन कहता है मैं जिंदा नहीं,
बस बचपन ही तो गया है।

पैसे तो बहुत हैं, पर काश,
बचपन खरीद पाता।

पुरानी यादें शायरी 2 लाइन

पुराने आंगन में आज भी बचपन की हंसी सुनाई देती है,
वक्त गुजर गया, पर वो खुशियां वहीं दिखाई देती हैं।

छोटी-सी छुट्टी, लंबी बातें और घर का प्यार,
वो दिन ही थे जिनमें छिपा था जीवन का असली संसार।

पुरानी गलियों की धूल भी अब खुशबू लगती है,
बचपन की हर बात आज कहानी लगती है।

रात की चुप्पी में कुछ आवाजें लौट आती हैं,
बीती हुई बातें आंखों को फिर भिगो जाती हैं।

नींद आने से पहले तेरा ख्याल आ जाता है,
पुराना कोई पल दिल को फिर तड़पा जाता है।

वो अधूरे वादे अब भी याद आते हैं,
हम मुस्कुरा तो देते हैं, पर आंखें भर जाती हैं।

दोस्ती दूर हुई, पर दिल से दूर नहीं हुई,
पुरानी हंसी आज भी यादों से कम नहीं हुई।

स्कूल की बेंच और दोस्तों की वो टोली याद आती है,
जिंदगी व्यस्त हो जाए, फिर भी दोस्ती मुस्कुराती है।

बचपन की गलियों और खेलों की यादें

गली में खेलते-खेलते शाम हो जाती थी,
मां की आवाज सुनकर ही घर की याद आती थी।

न खिलौनों की कमी थी, न खुशियों का हिसाब,
बचपन में हर दिन लगता था जैसे कोई त्योहार।

वो कंचे, वो पतंगें और दोस्तों का साथ,
अब यादों में मिलते हैं बचपन के वो दिन खास।

Leave a Comment