किसी अपने के जाने के बाद शब्द साथ छोड़ देते हैं, लेकिन एक छोटी सी शायरी मन की बात कह देती है। मौत पर शायरी इंसान के भीतर छिपे दर्द, अपनों से बिछड़ने की कसक, अधूरी मोहब्बत, जुदाई की तड़प और पुरानी यादों को शब्दों में बयां करती है। यह जीवन की नश्वरता और मौत की सच्चाई का एहसास भी कराती है।
इसे प्रियजन की याद, श्रद्धांजलि, बरसी, सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सऐप स्टेटस या शोक संदेश में साझा किया जाता है।
Maut Shayari in Hindi

ऐ मौत आ कर हमको खामोश तो कर गयी तू,
मगर सदियों दिलों के अंदर हम गूंजते रहेंगे।
ये मौत तेरी आगोश में एक दिन खो जायेंगे,
दो गज ज़मी ओढ़कर हम भी सो जायेंगे।
इस ज़िंदगी से मौत की उम्मीद न रख,
क्योंकि मौत भी एक रोज़ ज़रूर आएगी!
मेरी मौत उस दिन ही हो गई थी,
जिस दिन तुमने मुझको धोखा दिया,
अब तो बस खाक होना बाकी हैं!
हर रोज़ जिंदगी के जंजाल में हम हैं,
ये मेरी मौत तेरे इंतज़ार में हम हैं।
अब हमें ज़िन्दगी की तमाम राहों में,
मौत की सज़ा भी खुद ब खुद समाएगी!
मौत का भी इलाज हो शायद,
ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं।
ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था,
हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते।
अपनी मौत भी क्या मौत होगी,
एक दिन यूँ ही मर जायेंगे तुम पर मरते मरते।
जीने की वजह तक नहीं पूछी सारी उम्र किसी ने,
और मौत के दिन सबने पूछा की कैसे मरा।
मौत से क्या डर मिनटों का खेल है,
आफत तो जिंदगी है जो बरसो चला करती है।
यूँ तो हादसों में गुजरी है हमारी ज़िन्दगी,
हादसा ये भी कम नहीं कि हमें मौत न मिली।
मौत एक सच्चाई है उसमे कोई ऐब नहीं,
क्या लेके जाओगे यारों कफन में कोई जेब नही।
ए जिंदगी अब मेरा हिसाब,
मुनासिब कर दे मौत से,
मेरी मुलाकात करा दे।
तमाम उम्र जो हमसे बेरुखी की सबने,
कफन में हम भी अजीजो से मुँह छुपा के चले।
मौत को यूं ही बदनाम करते हैं लोग,
तकलीफ तो साली जिंदगी देती है।
ऐ ज़िंदगी अब मेरा हिसाब मुनासिब कर दे 😔
मौत से मेरी मुलाक़ात करा दे।
ज़िंदगी ने बहुत रुलाया मुझको,
अब मौत से ही उम्मीद लगा बैठा हूँ।
न जाने कब बुला ले वो ऊपर वाला,
यहाँ तो हर साँस उधार की है।
जो आज हँस रहे हैं कल रोएँगे,
मौत किसी को रिहर्सल नहीं देती।
मौत से डरता नहीं मैं,
बस अपनों को छोड़ने का ग़म है।
कौन सा गुनाह किया तूने ए दिल ना,
जिंदगी जीने देती है और ना मौत आती है।
छीन ली मुझसे मेरी पहली जिंदगी,
अब मेरी मौत का फायदा उठाती है,
फूल चढाने के बहाने मेरी कब्र पे,
वो किसी और से मिलने आती है।
दर्द गूंज रहा दिल में शहनाई की तरह,
जिस्म से मौत की ये सगाई तो नहीं!
आता है कौन कौन तेरे गम को बांटने,
तू अपनी मौत की अफवाह उड़ा के देख!
तुमसे मोहब्बत करना मेरी खता हो गई
मौत ही मेरी जिंदगी की सजा हो गई!
अचानक मौत पर शायरी
वो हँसी, वो बातें अब यादों में रह गईं,
अचानक मौत ने खुशियाँ छीन लीं।
अकेलेपन की आग में जलती है रातें,
जब किसी अपने की अचानक मौत हो जाती है।
अचानक मौत एक ऐसा घाव है,
जो भरने का नाम ही नहीं लेता।
वो हँसी, वो बातें अब सिर्फ़ खामोश यादें हैं,
अचानक मौत ने उन्हें अधूरा छोड़ दिया।
मौत ने छीन लिया हर सुख-दुख का साथी,
अब तो दिल बस तन्हाई का सहारा लेता है।
ज़िंदगी ने हर मोड़ पर कुछ सिखाया,
मौत ने सिखाया सब कुछ यहीं रह जाएगा।
जन्म से मृत्यु तक का ये छोटा सा सफ़र,
हर सांस में छुपा है एक आख़िरी डर।
ज़िंदगी किताब सी है, हर पन्ना नया,
मौत बस वो विराम है, जहाँ सब थम सा गया।
अपनों की याद में मौत पर शायरी
परिवार, मित्र या जीवनसाथी के जाने के बाद उनकी छोटी-छोटी बातें बहुत याद आती हैं। उनका नाम, हंसी, सलाह और साथ जीवन का हिस्सा बन चुके होते हैं।
तुम्हारी मुस्कान अब तस्वीरों में मिलती है,
मगर उसकी रोशनी आज भी घर में खिलती है।
ज़िंदगी के सफर में, कुछ यादें छूट जाती हैं,
मौत के बाद भी, वो यादें कभी नहीं भुलाती हैं।
जो चले गए हैं, उनकी यादें आज भी साथ रहती हैं,
आँखें नम हो जाती हैं, जब उनकी बातें याद आती हैं।
कुछ लोग बिछड़कर भी दिल से दूर नहीं होते,
उनकी यादों के बिना हम कभी मजबूर नहीं होते।
वक्त गुजर गया, मगर यादें वही पुरानी हैं,
अपनों के जाने की आज भी आँखों में कहानी है।
तुम चले गए, मगर यादों में आज भी बसे हो,
मेरी हर धड़कन में तुम पहले की तरह बसे हो।
मौत ने छीन लिया तुमको हमसे हमेशा के लिए,
मगर यादें तुम्हारी रहेंगी दिल में उम्रभर के लिए।
तेरी कमी आज भी दिल को बहुत सताती है,
तेरी याद आते ही आँखें भर आती हैं।
कुछ रिश्ते मौत के बाद भी खत्म नहीं होते,
अपनों की यादों के आगे आँसू कम नहीं होते।
आखिरी विदाई तो दे दी, मगर दिल मानता नहीं,
तुम नहीं हो पास, ये सच आँखें मानती नहीं।
जो अपने थे, वो यादों का खजाना छोड़ गए,
जाते-जाते आँखों में नमी और दिल में दर्द छोड़ गए।
तुम्हारी यादों को दिल से कभी मिटा नहीं पाएंगे,
तुम दुनिया में नहीं, फिर भी तुम्हें भुला नहीं पाएंगे।
एक चेहरा था जो अब तस्वीरों में रह गया,
एक अपना था जो यादों में हमेशा के लिए रह गया।
तुम्हारे जाने का गम हमेशा दिल में रहेगा,
तुम्हारा नाम हमारी हर दुआ में रहेगा।
मौत तो नाम है बस, खामोश हो जाने का,
वरना रूह तो हर पल, खुदा से मिलने को बेताब है।
महबूब की याद में मौत पर शायरी
महबूब की याद में आज भी आँखें नम हो जाती हैं,
वो दूर हैं मगर उनकी यादें हर पल पास आती हैं।
तेरे बिना ये जिंदगी भी अधूरी सी लगती है,
तेरी याद आती है तो मौत भी प्यारी लगती है।
महबूब बिछड़ा तो दिल ने जीना ही छोड़ दिया,
उसकी यादों ने हर खुशी से रिश्ता तोड़ दिया।
तेरी यादों का दर्द दिल से जाता नहीं,
तू लौटकर आएगा, ये दिल मानता नहीं।
मौत भी आए तो तेरी याद साथ रहे,
आखिरी साँस तक बस तेरा ही नाम रहे।
तू नहीं है फिर भी तेरी खुशबू साथ रहती है,
तेरी याद ही अब मेरे जीने की वजह रहती है।
तेरे बिछड़ने का गम दिल से मिटा नहीं पाए,
चाहकर भी तुझे अपनी यादों से भुला नहीं पाए।
महबूब की याद में हर रात गुजर जाती है,
आँख लगती नहीं, बस तेरी तस्वीर नजर आती है।
काश मौत से पहले एक बार तुझसे मुलाकात हो,
फिर चाहे आखिरी साँस हो या आखिरी रात हो।
तेरे बिना जीना अब सजा सा लगता है,
तेरी यादों में मर जाना दुआ सा लगता है।
तू चला गया तो जिंदगी वीरान हो गई,
तेरी याद ही अब मेरी पहचान हो गई।
आखिरी साँस भी तेरी याद में लेना चाहते हैं,
इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में तुझे पाना चाहते हैं।
दोस्त की मौत पर शायरी
दोस्ती एक ऐसा अनमोल रिश्ता है, जो दिलों को बिना किसी स्वार्थ के जोड़कर रखता है। लेकिन जब कोई प्यारा दोस्त अचानक जिंदगी का साथ छोड़कर हमेशा के लिए दूर चला जाता है, तो उसकी कमी कभी पूरी नहीं हो पाती। पीछे रह जाती हैं उसकी बातें, मुस्कान और साथ बिताए अनगिनत खूबसूरत पल।
इसी गहरे दुख और दोस्त की यादों को शब्दों में बयां करती कुछ दोस्त की मौत पर शायरी.
दोस्त तू चला गया, मगर तेरी यादें साथ हैं,
आज भी दिल में तेरे हँसते हुए जज़्बात हैं।
खामोश है रास्ता, सूना है शहर,
तेरे बिना अधूरा है मेरा हर सफर।
तस्वीर में मुस्कान तेरी आज भी वैसी है,
बस सामने बैठकर हंसाने वाली आवाज नहीं है।
तू था तो हर मुश्किल आसान लगती थी,
तेरे बाद हर खुशी अनजान लगती है।
दोस्ती हमारी वक्त से भी आगे थी,
इसलिए तेरी कमी हर पल महसूस होती है।
तू साथ होता तो हर मुश्किल आसान होती,
अब तेरी यादों के सहारे ही, ये ज़िंदगी गुज़रती है।
तेरे बिना महफ़िल में अब वो बात नहीं रही,
दोस्त, तेरे जाने के बाद जिंदगी वैसी नहीं रही।
हम दोनों का सफर था, हँसते-हँसते चलना,
पर तू बीच राह में ही, मुझे अकेला छोड़ गया।
दोस्त चला गया, पर दोस्ती रह गई,
उसकी हर बात दिल में बसी रह गई।
एक सच्चा दोस्त खोया है, दर्द बहुत गहरा है,
तेरी यादों के सिवा अब कौन हमारा ठहरा है।
मौत तुझे हमसे दूर ले गई हमेशा के लिए,
मगर तू दिल में रहेगा जिंदगी भर के लिए।
तेरी हँसी, तेरी बातें आज भी याद आती हैं,
दोस्त, तेरी कमी हर पल आँखें नम कर जाती है।
यकीन नहीं होता कि तू अब हमारे बीच नहीं,
तेरी यादों के अलावा अब कोई चीज़ तेरे करीब नहीं।
कौन से प्रसिद्ध शायरों ने मौत पर शायरी लिखी है?
प्रसिद्ध शायरों में ग़ालिब, फैज़ अहमद फ़ैज़, और सागर निज़ामी जैसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं में मृत्यु के विभिन्न पहलुओं को छुआ है।